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यूपी में निदेशक कोषागार पद पर नियमित तैनाती न हो पाने की क्या है वजह? अतिरिक्त चार्ज के रूप में फिर हुई तैनाती से उठ रहे सवाल  

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की अफसरशाही में गजब तमाशे हैं. वित्तीय मामलों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार सख्त हैं और पारदर्शिता का पाठ अफसरों और अपने सहयोगियों को पढ़ाते रहते हैं. फिर भी उत्तर प्रदेश का वित्त विभाग लगभग 01 वर्ष से निदेशक कोषागार के पद पर नियमित तैनाती नहीं कर पाया है. कोषागार निदेशक नीलरतन के सेवानिवृत होने के बाद अब तक तीसरे अधिकारी शासन के वित्त विभाग में विशेष सचिव पद पर तैनात विजय कुमार सिंह को अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया है. इसके पहले इस पद पर साधना श्रीवास्तव फिर पंकज सक्सेना को अतिरिक्त चार्ज देकर तैनात किया जा चुका है.  

वित्तीय अनुशासन की हिमायती योगी सरकार के वित्त विभाग में मनमानेपन के ढेर का आलम यह है कि यहाँ वित्तीय से लेकर मानव संसाधन प्रबंधन, सबमें उदासीनता का खेल चल रहा है. लेखाकार से लेकर निदेशक कोषागार तक के पदों में अतिरिक्त प्रभार के जिस जुगाड़ तंत्र को वित्त विभाग द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है वह सरकार के कुशल वित्तीय प्रबंधन पर और मानव संशाधन के प्रबंधन पर सवालिया निशान लगाता है. शासन में हावी इस जुगाड़ तंत्र से मुख्यमंत्री और सरकार की पारदर्शी व्यवस्था की मंशा पर रोड़े अटकाता है.  

उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डालर इकोनोमी बनाने के घोषित लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही योगी सरकार, सरकारी राजस्व में वृद्धि और राजकीय व्यवस्था में वित्तीय अनुशासन बनाये रखने की दिशा में कोशिश करती दिख रही है. और वित्तीय गड़बड़ियों, घूसखोरी व लापरवाही की शिकायत पर अभी तक कई अफसरों पर निलंबन जैसी कार्यवाई भी कर चुकी है. इसके बावजूद वित्तीय अनुशासन बनाये रखने और योजनाओं के वित्तीय अनुश्रवण के लिए उत्तरदायी वित्त विभाग में सब कुछ ठीक चल रहा हो ऐसा नहीं लग रहा है. वित्त विभाग का मानव संसाधन प्रबंध सवालों के घेरे में है.

सूबे के खजाने का प्रबंध देखने वाले कोषागार निदेशालय में पूर्णकालिक निदेशक की तैनाती के मामले में शासन आखिर किस पसोपेश में है जिसके चलते वह एक पूर्णकालिक निदेशक नहीं तैनात कर पा रहा है. निदेशक, कोषागार नीलरतन के सेवानिवृत्त होने के बाद ऐसे संवेदनशील पद पर पूर्णकालिक निदेशक की तैनाती अभी तक नहीं की जा सकी है. जिससे तमाम सवाल उठ रहे हैं और इस तरह की तैनाती सवालों के घेरे में है.

गौरतलब यह भी है कि उत्तर प्रदेश शासन का वित्त विभाग अपने मातहतों की नियमित तैनाती, पदोन्नतियां और स्थानांतरण सही समय से नहीं कर रहा है. ग्रेड वेतन 5400 से लेकर ग्रेड वेतन 8700 तक के पदों पर रिक्तियां बरकरार है लेकिन पदोन्नतियों के लिए फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही है. सहायक लेखा अधिकारी से लेखाधिकारी के पद पर पदोन्नति के लिए पिछले दो वर्षों से डीपीसी ना हो पाने के कारण चयन वर्ष 2022-23 और 2023-24 की रिक्तियों के सापेक्ष 82 पदों पर पदोन्नति की कार्यवाही ठप है. हालांकि मुख्य सचिव ने वर्ष 2024-25 की रिक्तियों को भी तत्काल भरे जाने के लिए पदोन्नति के कार्रवाई पूर्ण किए जाने के निर्देश पूर्व में ही दे दिए हैं. लेकिन वित्त विभाग है कि अपने पुराने मिजाज के अनुसार ही काम कर रहा है. निचले स्तर पर सहायक लेखाकार और लेखाकार की कमी झेल रहे वित्त विभाग के मानव संसाधन में उच्च स्तर के अधिकारियों की नियमित तैनाती में विलंब भी चिंता का विषय है.

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