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शासनादेश को दरकिनार कर पदोन्नति में रोड़ा, वित्त लेखा सेवा संवर्ग के कर्मियों में हताशा  

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : वित्त लेखा सेवा संवर्ग के कर्मियों की पदोन्नति में जिम्मेदार शासनादेश को दरकिनार कर मनमाना तरीका अपनाए हुए हैं जबकि पद रिक्त हैं और पदोन्नति के लिए अधिकारी/कर्मचारी उपलब्ध हैं. जिम्मेदारों की इस मनमानेपन को लेकर उत्तर प्रदेश लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा परिसंघ द्वारा निदेशक आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा उत्तर प्रदेश को पत्र लिखा है. संघ ने अपने पत्र में उत्तर प्रदेश लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा परिसंघ ने चयन वर्ष 2024-25 में वित्त एवं लेखा अधिकारी के रिक्त पदों पर पदोन्नति के लिए सहायक लेखाधिकारियों की गोपनीय प्रविष्टियां एवं प्रमाण पत्र निदेशक, कोषागार को तत्काल भेजने की मांग निदेशक, आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग उत्तर प्रदेश से की है.

बताते चलें कि उत्तर प्रदेश में सहायक लेखा अधिकारी (AAO) से वित्त एवं लेखा अधिकारी संवर्ग में विभागीय पदोन्नति कमेटी (DPC) की बैठक अप्रैल के प्रथम सप्ताह में प्रस्तवित है. इस बैठक में वर्ष 2021-22,2022-23 एवं 2023-24 के सापेक्ष वित्त एवं लेखाधिकारी के कुल 82 पदों के लिए पदोन्नति की कारवाई की जानी है. लेकिन इसी बीच शासन ने निदेशक कोषागार को चयन वर्ष 2024-25 के लिए रिक्त 20 पदों के लिए भी अधियाचन लोकसेवा आयोग को भेजे जाने की जरूरत बताते हुए निदेशक आंतरिक लेखा परीक्षा को सहायक लेखा अधिकारियों की वर्ष 2023-24 की गोपनीय प्रविष्टियाँ तत्काल उपलब्ध कराने की अपेक्षा की. लेकिन समय नजदीक आने और CR निदेशक कोषागार को न मिलने के कारण परिसंघ को पत्र लिखना पड़ा.   

गौरतलब है कि शासन ने चयन वर्ष 2024-25 के लिए पदोन्नति की कार्यवाई ससमय पूरी करने के लिए 05 जून 2024 को ही शासनादेश जारी कर दिया था. और शासन के वित्त विभाग ने अधिनस्थ लेखा सेवा संवर्ग के कार्मिकों के सेवा सम्बन्धी प्रकरणों को  सुव्यवस्थित रखरखाव के उद्देश्य से ही आंतरिक लेखा निदेशालय को जिम्मेदारी दी है. लेकिन आलम यह है कि पदोन्नति में हो रहे विलम्ब को देखते हुए कई कार्मिक हताश होकर पदोन्नति से ही इनकार करने लगे हैं.

वित्त विभाग में यह सब तब हो रहा है जब राजनीतिक सरगर्मियों से परे योगी सरकार का फोकस अब अपने मानव संसाधन प्रबंधन पर है. अफसरशाही के कील-कांटे दुरुस्त कर स्वच्छ और पारदर्शी प्रशासन देने की प्रक्रिया में एक ओर जहां दागी अफसरों पर जांच और निलंबन की कार्रवाई की जा रही है तो वहीं दूसरी ओर लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवाएं आयोग के माध्यम से भर्तियों को भी गति प्रदान की जा रही है. लेकिन सरकार के वित्त विभाग के जिम्मेदार पदोन्नति में शासन के आदेश अनुपालन में हीला हवाली करते हुए लालफीताशाही के कारनामे दिखाने में जुटे हुए हैं. ताज्जुब यह है कि यह सब विभाग के जिम्मेदार वरिष्ठ व अनुभवी मंत्री की नाक के नीचे हो रहा है और शासन के वित्त विभाग में तैनात विशेष सचिवों की भारी भरकम टीम भी इसको देख पाने में नाकाम है और शासन की मंशा पर पानी फेर रही है.      

afsarnama
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